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नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) फॉर कार्बन ब्रीफ के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, आधी सदी से अधिक समय में पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत में कोयले से बिजली उत्पादन दो साल की अवधि में नहीं बढ़ा है, जबकि इस दौरान बिजली की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में क्लीन एनर्जी स्रोतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विश्लेषण में बताया गया है कि 2024 के पहले छह महीनों और 2026 के पहले छह महीनों के बीच स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन में करीब 70 टेरावाट-घंटे (TWh) की बढ़ोतरी हुई।
यह वृद्धि बिजली की मांग में हुई बढ़ोतरी से अधिक रही। इस अवधि में बिजली की मांग करीब 63 TWh यानी लगभग 7 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, क्लीन एनर्जी से बढ़ा उत्पादन अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम रहा, जिससे कोयला आधारित बिजली उत्पादन में वृद्धि की जरूरत कम हुई।
भारत लंबे समय से अपनी बिजली जरूरतों के लिए कोयले पर काफी निर्भर रहा है। देश में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा अब भी कोयला आधारित संयंत्रों से आता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की क्षमता तेजी से बढ़ी है।
विश्लेषण के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र में यह बदलाव भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद कोयले पर अतिरिक्त दबाव नहीं बढ़ा है। इससे पावर सेक्टर से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी का सीधा असर बिजली क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन पर पड़ा है। पहले छह महीनों में पावर सेक्टर से जुड़े CO₂ उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई। हालांकि, उत्सर्जन में बदलाव कई अन्य कारकों जैसे बिजली उत्पादन, ईंधन उपयोग और मांग के पैटर्न पर भी निर्भर करता है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार, पवन ऊर्जा क्षमता में वृद्धि और हरित ऊर्जा से जुड़ी योजनाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बिजली की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है। इसका कारण बढ़ता औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरतें हैं। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
कोयले से बिजली उत्पादन में वृद्धि नहीं होना ऊर्जा बदलाव की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को अभी लंबे समय तक कोयला आधारित बिजली उत्पादन की जरूरत रहेगी, क्योंकि देश की कुल बिजली व्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
क्लीन एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी के बावजूद बिजली ग्रिड की स्थिरता, ऊर्जा भंडारण और लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मौसम पर निर्भर होते हैं, इसलिए बैटरी स्टोरेज और अन्य तकनीकों का विकास जरूरी माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऊर्जा क्षेत्र धीरे-धीरे बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर बिजली की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर नई ऊर्जा क्षमता इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हालांकि, यह बदलाव अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले वर्षों में इसकी गति कई नीतिगत फैसलों, निवेश और तकनीकी विकास पर निर्भर करेगी। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उत्सर्जन में कमी लाने के अपने लक्ष्यों को भी हासिल करे।
फिलहाल CREA और कार्बन ब्रीफ के विश्लेषण को ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बदलाव के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पहली बार लंबे समय बाद कोयला आधारित बिजली उत्पादन में स्थिरता और क्लीन एनर्जी उत्पादन में वृद्धि भारत के ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।





